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Showing posts from 2017

इश्क़ के बाजार।

इश्क़ के बाज़ार में दिल की कीमत क्या है, ऐ खरीदार बता तेरी नीयत क्या है। मैंने घर में कई आफताब सजाय रक्खे हैं, और मुखालिफ पूछता है कि तेरी खासियत क्या है।

हवाओं से डरते हैं।

न पीर,न काहीन, न क़ज़ा न खुदाओं से डरते हैं, ये बुज़दिल हैं अमन की हवाओं से डरते हैं। मरम्मत की साख पर अपना जिस्म सौंपने वाले, अब वो हकीम की दवाओं से डरते हैं। वो बेखौफ खुलेआम काले क...

बेटा

नन्ही सी जान को मखमल में लपेटा हुआ है, अस्पताल चीख रहा है, मुबारक हो बेटा हुआ है।                                मुबारक हो बेटा हुआ है। वो बीमार है मगर चूल्हे के पास बैठी है, ये रोटी खा कर भी तकिये पर लेटा हुआ है।                          मुबारक हो बेटा हुआ है। वो मेहनतकश थी तो अफसर बन गयी, ये फरेबी,मक्कार,झूठा नेता हुआ है।                 मुबारक हो बेटा हुआ है। वो पाई-पाई कर बाप का कर्ज़ा चुकाती है, ये पान,सिगरेट,शराबखाने का उधार समेटा हुआ है।                                 ...

ग़ालिब के पाप।

अब मुझे चाँद के दाग दिखने लगे हैं, ऐ ग़ालिब तेरे पाप दिखने लगे हैं। अरसा हो गया अपने जिस्म का कतरा दान किये, अब जाके मुझे गली के हजाम दिखने लगे हैं। बरसों से लड़ते आये हो तुम दोनो...

दो भाई।

तीज-ओ-त्योहार के साबिल का इम्तेहान भी मेरा था, मगर दीवाली भी मेरी थी रमज़ान भी मेरा था। क़ज़ा ने बांट दिए कुदरत के जुफ्त को भी, वरना ये ज़मीं भी मेरी थी आसमान भी मेरा था। मुल्क की आज़...

सरकार कहते हो?

गुनाह तुम करो और हमें गुनाहगार कहते हो, ये अली बाबा 40 चोर हैं और तुम सरकार कहते हो। ये सियासत है इसमें तमाम ईमान बिक गए, गरीबों से छीन के गरीबों को बाटते हैं और तुम मददगार कहते ह...

समझो।

हो सके तो किसी को समझना सीखो, समझाने वाले  दुनिया में बहुत मिलेंगे।

हमदर्दी

वो हमदर्दी देते हैं अब नक़ाब रक्खूँगा, लोग सयाने हैं चेहरा पढ़ लिया करते हैं।

बुलाती तो होगी।

सालों पहले बोया पेड़,उसकी छांव तेरे आंगन तक आती तो होगी, उसके तने पर खुदरे हुए नाम देखकर तुझे शर्म आती तो होगी, बुस्तां में अकेले बैठकर रोया करती है तू तुझे देखकर तितलियां तुझ...

पहली पंक्तियाँ।

दिल जीत ले वो असर हम भी रखते हैं, भीड़ में भी आए नज़र वो असर हम भी रखते हैं, यूँ तो वादा किया है किसी से हर दम मुस्कुराने का वरना इन आँखों में समंदर हम भी रखते हैं।