ग़ालिब के पाप।
अब मुझे चाँद के दाग दिखने लगे हैं,
ऐ ग़ालिब तेरे पाप दिखने लगे हैं।
अरसा हो गया अपने जिस्म का कतरा दान किये,
अब जाके मुझे गली के हजाम दिखने लगे हैं।
बरसों से लड़ते आये हो तुम दोनों भाई,
अब जाके मुझे अमन के पैगाम दिखने लगे हैं।
ऐ उपरवाले क्या सूरत बना दी मेरे देश की,
अब तो मुझे मंदिर में रहीम और मस्जिद में राम दिखने लगे हैं।
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