सरकार कहते हो?
गुनाह तुम करो और हमें गुनाहगार कहते हो,
ये अली बाबा 40 चोर हैं और तुम सरकार कहते हो।
ये सियासत है इसमें तमाम ईमान बिक गए,
गरीबों से छीन के गरीबों को बाटते हैं और तुम मददगार कहते हो।
कुर्सी कुर्सी का खेल है यहाँ कोई किसी का बाप नहीं
इनके कुत्ते भी इन्ही को काटते हैं और तुम वफादार कहते हो।
ऐ हाज़रिं ज़रा सुखन का कुछ तो ख्याल करो,
आज कल के लौंडो को गुलज़ार कहते हो।
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