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Showing posts from 2019

डर लगता है।

बुलंदियों को छूने में समय कब लगता है। मुझे मंज़िल से खूबसूरत सफर लगता है। ख्वाब तो हमारे भी थे मीलों दूर जाने के, मगर उसी रास्ते में मेरा घर लगता है। बेटा घर की दहलीज़ बढ़ाने को कहता है लेकिन, क्या करें बीच में शजर लगता है। हम भी जश्न मनाते थे अपने घर में कभी, मगर अब बेटी होती है तो डर लगता है।

सरकार

गिरते को गिराने की दरकार में आ गए, जितने अपाहज नेता थे सरकार में आ गए। जो गोंच अकेले लाखों का खून चूसा करते थे, करोड़ों का पीने वास्ते परिवार में आ गए। इसकी लूट उसपर कब्जा सबका ...

रैन

कभी यूँ भी हम रातें गुज़ारा करते हैं, कागज़ पर लिखते हैं, मिटाया करते हैं। शहर से दूर अपने गांव की याद में, बगीचे की धूल उड़ाया करते हैं। अपने बच्चों का बचपन फिर देखने को, बूढ़े कंध...

मौत

लाख मांगों मगर कभी हाथ नहीं देती, मौत आ जाए तो ज़िन्दगी साथ नहीं देती।