सरकार
गिरते को गिराने की दरकार में आ गए,
जितने अपाहज नेता थे सरकार में आ गए।
जो गोंच अकेले लाखों का खून चूसा करते थे,
करोड़ों का पीने वास्ते परिवार में आ गए।
इसकी लूट उसपर कब्जा सबका मुँह कुचलने को,
ये नापाक हाथ इंसाफ के दरबार पे आ गए।
जेबों पर जो मार पड़ी, दमडी पे जो हमला हुआ,
सारे गरीब घर से निकल के,बाजार में आ गए।
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