न पीर,न काहीन, न क़ज़ा न खुदाओं से डरते हैं, ये बुज़दिल हैं अमन की हवाओं से डरते हैं। मरम्मत की साख पर अपना जिस्म सौंपने वाले, अब वो हकीम की दवाओं से डरते हैं। वो बेखौफ खुलेआम काले क...
नन्ही सी जान को मखमल में लपेटा हुआ है, अस्पताल चीख रहा है, मुबारक हो बेटा हुआ है। मुबारक हो बेटा हुआ है। वो बीमार है मगर चूल्हे के पास बैठी है, ये रोटी खा कर भी तकिये पर लेटा हुआ है। मुबारक हो बेटा हुआ है। वो मेहनतकश थी तो अफसर बन गयी, ये फरेबी,मक्कार,झूठा नेता हुआ है। मुबारक हो बेटा हुआ है। वो पाई-पाई कर बाप का कर्ज़ा चुकाती है, ये पान,सिगरेट,शराबखाने का उधार समेटा हुआ है। ...
अब मुझे चाँद के दाग दिखने लगे हैं, ऐ ग़ालिब तेरे पाप दिखने लगे हैं। अरसा हो गया अपने जिस्म का कतरा दान किये, अब जाके मुझे गली के हजाम दिखने लगे हैं। बरसों से लड़ते आये हो तुम दोनो...