मंदिर

जो चलते है डर डर के उन्हें और तनिक डराएंगे,
कसम राम की खाते हैं हम मंदिर वहीं बनाएंगे।
कसम राम...............

शरीफ पगड़ियों ने सियासी शमशीर से कहा है,
हम सेंवई ईद की खाते हैं दीवाली की खीर भी खाएंगे।
कसम राम...............

दहशत के अंधेरों में अमन के चरागों पर,
हम जम्मू तक तो जाते हैं,काशमीर भी जाएंगे।
कसम राम...............

मज़हबी अलम गिरेंगे, इंसानियत का परचम होगा,
जब देश में बाबा बुल्लेशाह और संत कबीर पढ़ाएंगे।
कसम राम...............

Comments

Popular posts from this blog

मरीज़ -ए-इश्क़

Bhaijaan

डुबकी मारो गंगा है।