ईमान
दिल-ओ-दिमाग और ईमान सब काले पड़ गए,
एक ज़बान थी चाट चाट कर उसमें भी छाले पड़ गए।
जब भी जीतना चाहा इंसान को इंसानियत से,
बीच में मंदिर,मस्जिद और शिवाले पड़ गए।
सभी चश्मदीद हैं यहाँ गुनाहों के मंज़र के,
अदालत सच पूछने लगी तो ज़ुबाँ पे ताले पड़ गए।
दिल-ओ-दिमाग और ईमान सब काले पड़ गए,
एक ज़बान थी चाट चाट कर उसमें भी छाले पड़ गए।
जब भी जीतना चाहा इंसान को इंसानियत से,
बीच में मंदिर,मस्जिद और शिवाले पड़ गए।
सभी चश्मदीद हैं यहाँ गुनाहों के मंज़र के,
अदालत सच पूछने लगी तो ज़ुबाँ पे ताले पड़ गए।
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