जलाने के काम आए।
ताउम्र मेरी रूह-ओ-जां ज़माने के काम आए,
और जब मरे तो फकत जलाने के काम आए।
सारी रात सिरहाने से लिपटकर रोया मैं,
और वही शब-ए-फुरकत में सुलाने के काम आए।
वो जो छुपके बैठे हैं मुस्कुराते हुए,
वही शख्स हैं जो रुलाने के काम आए।
ताउम्र मेरी रूह-ओ-जां ज़माने के काम आए,
और जब मरे तो फकत जलाने के काम आए।
सारी रात सिरहाने से लिपटकर रोया मैं,
और वही शब-ए-फुरकत में सुलाने के काम आए।
वो जो छुपके बैठे हैं मुस्कुराते हुए,
वही शख्स हैं जो रुलाने के काम आए।
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