ताउम्र मेरी रूह-ओ-जां ज़माने के काम आए, और जब मरे तो फकत जलाने के काम आए। सारी रात सिरहाने से लिपटकर रोया मैं, और वही शब-ए-फुरकत में सुलाने के काम आए। वो जो छुपके बैठे हैं मुस्कुर...
जुबा पे नारायण,जेबों पर गांधी जी की छाया है, सब दुनियादारी है,सब मोह माया है। सब दुनिया.................... दीवारों पर राम नाम आंगन में अंधों का डेरा है, गुफा के अंदर कुछ और छुपाया है। सब दुनि...