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Showing posts from June, 2018

चूना

कभी एक कभी डेढ़ कभी दोगुना लगाते हो, किस-किस तरह जनता को चूना लगाते हो।

जलाने के काम आए।

ताउम्र मेरी रूह-ओ-जां ज़माने के काम आए, और जब मरे तो फकत जलाने के काम आए। सारी रात सिरहाने से लिपटकर रोया मैं, और वही शब-ए-फुरकत में सुलाने के काम आए। वो जो छुपके बैठे हैं मुस्कुर...

मोह माया।

जुबा पे नारायण,जेबों पर गांधी जी की छाया है, सब दुनियादारी है,सब मोह माया है। सब दुनिया.................... दीवारों पर राम नाम आंगन में अंधों का डेरा है, गुफा के अंदर कुछ और छुपाया है। सब दुनि...