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Showing posts from January, 2019

रैन

कभी यूँ भी हम रातें गुज़ारा करते हैं, कागज़ पर लिखते हैं, मिटाया करते हैं। शहर से दूर अपने गांव की याद में, बगीचे की धूल उड़ाया करते हैं। अपने बच्चों का बचपन फिर देखने को, बूढ़े कंध...

मौत

लाख मांगों मगर कभी हाथ नहीं देती, मौत आ जाए तो ज़िन्दगी साथ नहीं देती।