रात
आओ करें गुफ्तगू के फिर ये रात नही होगी, कल वो बात तो होगी मगर वो बात नही होगी। भीगे थे मेहबूब के साथ भरी बरसात में एक दिन, अब आयेंगे फिर कई सावन मगर वो बरसात नही होगी। तेरी ज़ुल्फ़ों सी शाम हो तेरे ओठों से जाम हो, चलो मीलों दूर के ऐसी मुलाक़ात नही होगी।